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मंत्रोच्चार के बीच धारण किए नए यज्ञोपवीत, श्रीविद्याधाम पर श्रावणी उपाकर्म
इंदौर. विमानतल मार्ग स्थित श्री श्रीविद्याधाम का प्रांगण आज विद्वान आचार्यों के समवेत मंगलाचरण-मंत्रोच्चार एवं श्लोक-मंत्रो की ध्वनि से गूंजता रहा।
श्रावणी उपाकर्म की तमाम विधियों में करीब 200 नए और 250 अन्य साधकों ने लगभग साढ़े पांच घंटों तक भाग लेकर नूतन यज्ञोपवीत धारण किए, बल्कि जाने-अनजाने में हुए पापकर्मों के लिए प्रायश्चित, दिवंगतों के लिए तर्पण, देवताओं के लिए सप्तऋषि पूजन, नए वर्ष में नीति और मर्यादा के मार्ग पर चलने के लिए हेमाद्रि संकल्प जैसे शास्त्रोक्त प्रावधानों का पालन भी किया.
आश्रम की विद्या पीठ के साठ नए बटुकों ने भी पहली बार इसमें भाग लिया़। आश्रम के संस्थापक ब्रम्हलीन स्वामी श्री गिरिजानंद सरस्वती भगवन की प्रेरणा से महामंण्डलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में आचार्य पं. राजेश शर्मा के निर्देशन में सुबह 9 बजे से मंगलाचरण एवं पवित्रीकरण के साथ श्रावणी उपाकर्म का श्रीगणेश हुआ।
आश्रम ट्रस्ट के पूनमचंद अग्रवाल, गोपाल मालू, डॉ. संजय पंडित ने बताया कि श्री श्रीविद्याधाम परिवार के सदस्यों ने तीर्थस्थलों, नदियों और सूर्य देवता की प्रार्थना से उपाकर्म का शुभारंभ किया.
पांच विद्वानों ने सबसे पहले दशविध स्नान की रस्म संपन्न कराई, जिसमें साधकों ने मिटटी, गोबर, भस्म, फल, दूध, पंचामृत, गोमूत्र, तीर्थजल एवं दुर्वा से स्नान किया.
शरीर प्रक्षालन-शुद्धिकरण के बाद ध्यान संध्या, सूर्य उपासना तथा तर्पण की क्रियाएं संपन्न हुई. देवों, ऋषियों, माता-पिता, मित्रों, सम्बंधियों सहित सभी दिवंगतों के साथ देश के लिए शहीद होने वाले सैनानियों के लिए भी तर्पण किया गया। प्रायश्चित कर्म और सप्तऋषि पूजन के बाद नए यज्ञोपवीत धारण किए गए। सग्रहमख गायत्री महायज्ञ एवं दान विधि के साथ इस दिव्य अनुष्ठान का समापन हुआ। स्वामी गिरिजानंद सरस्वती वेद-वेदांग विद्यापीठ के वेदपाठी बालकों ने इस प्रक्रिया में उत्साह के साथ भाग लिया.


